Published on Jul 25, 2026
नई दिल्ली: देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सिफारिश सामने आई है। संसद की एक स्थायी समिति ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि बढ़ती आबादी और बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के दायरे का चरणबद्ध विस्तार किया जाए, ताकि अधिक पात्र परिवारों को सस्ती दर पर खाद्यान्न का लाभ मिल सके। साथ ही देशभर में Smart PDS प्रणाली को तेज़ी से लागू करने पर भी जोर दिया गया है।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वर्तमान NFSA कवरेज पुराने जनसंख्या आंकड़ों पर आधारित है। ऐसे में कई पात्र परिवार अब भी योजना के दायरे से बाहर हैं। इसलिए समयबद्ध तरीके से खाद्य सुरक्षा योजना का विस्तार करने पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक योजना का लाभ पहुंच सके।
रिपोर्ट में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए SMART-PDS को चरणबद्ध तरीके से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू करने की अनुशंसा की गई है।
समिति का मानना है कि तकनीक आधारित राशन वितरण प्रणाली लागू होने से—
रिपोर्ट में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत बड़ी संख्या में संदिग्ध लाभार्थियों का भी उल्लेख किया गया है। समिति ने सुझाव दिया है कि ऐसे मामलों का समयबद्ध सत्यापन किया जाए, ताकि पात्र परिवारों को बिना किसी अनावश्यक देरी के योजना का लाभ मिलता रहे और गलत तरीके से शामिल नामों की पहचान की जा सके।
समिति ने केवल लाभार्थियों की पहचान पर ही नहीं, बल्कि शिकायत निवारण प्रणाली को भी मजबूत करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राशन कार्ड, वितरण या पात्रता से जुड़ी शिकायतों का तेज़ और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
इसके अलावा उचित मूल्य दुकानों (Fair Price Shops) की डिजिटल कनेक्टिविटी बेहतर करने और PDS की नियमित निगरानी बढ़ाने की भी सलाह दी गई है।
समिति के अनुसार आने वाले समय में डिजिटल तकनीक सार्वजनिक वितरण प्रणाली की रीढ़ बन सकती है। यदि सभी राज्यों में आधुनिक Smart PDS प्रणाली लागू होती है, तो राशन कार्ड प्रबंधन, खाद्यान्न आवंटन, लाभार्थी सत्यापन और वितरण प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज़ और पारदर्शी हो सकती है।
फिलहाल यह संसद की स्थायी समिति की सिफारिश है। इन सुझावों को लागू करने या इनमें बदलाव करने का अंतिम निर्णय केंद्र सरकार द्वारा लिया जाएगा। यदि सरकार इन सिफारिशों को स्वीकार करती है, तो आने वाले समय में देशभर के करोड़ों पात्र परिवारों को खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ मिल सकता है और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़े स्तर पर तकनीकी सुधार देखने को मिल सकते हैं।