Published on Jul 04, 2026
रांची: झारखंड सरकार द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत संचालित राशन कार्ड सत्यापन अभियान में रांची जिले से बड़ी कार्रवाई सामने आई है। जिला प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार सत्यापन के दौरान हजारों ऐसे लाभार्थियों की पहचान की गई है जो निर्धारित पात्रता मानकों पर खरे नहीं उतरे। अब तक 11,873 राशन कार्ड निरस्त किए जा चुके हैं, जबकि 43,941 से अधिक मामलों का सत्यापन अभी भी जारी है।
प्रशासन का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल पात्र परिवारों तक सरकारी खाद्यान्न का लाभ पहुंचाना और अपात्र लाभार्थियों को योजना से बाहर करना है।
रांची जिला प्रशासन ने विभिन्न सरकारी डेटाबेस के साथ राशन कार्डधारकों के रिकॉर्ड का मिलान किया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब तक 1,88,778 राशन कार्डधारकों की जानकारी की जांच की जा चुकी है।
सत्यापन के दौरान—
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि लंबित मामलों की जांच पूरी होने के बाद आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।
इस बार सत्यापन केवल राशन कार्ड रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहा। प्रशासन ने विभिन्न सरकारी विभागों के उपलब्ध आंकड़ों के साथ भी लाभार्थियों की जानकारी का मिलान किया।
जांच के दौरान मुख्य रूप से निम्न रिकॉर्ड का उपयोग किया गया—
यदि किसी लाभार्थी की जानकारी सरकारी पात्रता मानकों से मेल नहीं खाती मिली, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की गई।
पूरे अभियान में सबसे अधिक जांच भूमि स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड की गई।
आंकड़ों के अनुसार—
भूमि संबंधी जांच अभियान का सबसे बड़ा हिस्सा रही, जिसमें सबसे अधिक कार्रवाई भी इसी आधार पर दर्ज की गई।
प्रशासन ने अन्य विभागों से प्राप्त आंकड़ों का भी विश्लेषण किया। जांच के दौरान कई ऐसे लाभार्थी सामने आए जो पात्रता मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।
प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं—
जिला प्रशासन ने बताया कि जिन लोगों को जांच में अपात्र पाया गया है, उन्हें नियमानुसार नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
कुछ मामलों में नियमों के अनुसार—
भी की जा सकती है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल अपात्र लाभार्थियों की पहचान करने के लिए चलाया जा रहा है।
यदि कोई परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के पात्रता मानकों को पूरा करता है, तो उसके राशन कार्ड पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ेगा और उसे पहले की तरह नियमित रूप से राशन मिलता रहेगा।
जिला प्रशासन ने ऐसे लोगों से अपील की है जो वर्तमान में खाद्य सुरक्षा योजना की पात्रता पूरी नहीं करते हैं कि वे स्वेच्छा से अपना राशन कार्ड सरेंडर करें।
प्रशासन का कहना है कि इससे वास्तव में जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी खाद्यान्न का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकेगा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को अधिक पारदर्शी बनाया जा सकेगा।